Tuesday, November 18, 2008

ठहरिए...मिलिए जिंदगी की जंग जीतने वालों से














इसी साल चीन में ओलंपिक कवरेज के दौरान एक दिन इस कार्यक्रम को देखने का मौका मिला...सोच कर गया था कि 15-20 मिनट के शॉट्स एक पीटीसी और दो बाइट लेकर आधे घंटे में स्टोरी करके वापस आ जाउंगा...पर एक बार कार्यक्रम शुरू हुआ तो हिलने की हिम्मत नहीं हुई...मंच पर आने वाले कलाकार और उनकी शारीरिक चुनौतियों को जानने के बाद उनका आत्मविश्वास ऐसा था कि कुर्सी से उठने का दिल ही नहीं किया...हॉं करीब 3 घंटे बाद कार्यक्रम के खत्म खत्म होते होते आंखे ज़रूर भर आईं...और मंच पर जब सारे कलाकार एक साथ ऑडियंस का शुक्रिया अदा करने और अलविदा कहने पहुंचे तो आंसू छलक गए...तस्वीरें खुद-ब-खुद सब कुछ बयां करती हैं...मैंने करीब 200 से भी ज्यादा तस्वीरें ली थीं इस कार्यक्रम की, आप लोगों तक पहुंचा रहा हूं...इन तस्वीरों के साथ आपको छोड़ रहा हूं, इन्हें बहुत गौर से देखिए- याद रखिए ये लोग या देख नहीं सकते-सुन नहीं सकते-बिना सहारे के चल नहीं सकते- बोल नहीं सकते...इन्हें दुआएं दीजिए कि ये अपनी जिंदगी को इन चुनौतियों के बावजूद यूं ही रंगीन बनाए रखें...

MY DREAMS- थोड़ी सी जानकारी इस ग्रुप के बारे में...

चाइना डिसेबल्ड पीपल्स परफॉरमिंग आर्ट ट्रूप 1987 में शुरू हुआ था...ऐसे लोगों को दिमाग में रखकर जिनके लिए जिंदगी एक चुनौती है- ये वो लोग हैं जिन्होंने कभी हार नहीं मानी- एक ने दूसरे का हाथ थामा, दूसरे ने तीसरे का, तीसरे ने चौथे का और धीरे धीरे एक दूसरे के लिए आंख-कान-और आवाज बन गए...खूबसूरती और इंसानियत का संदेश लेकर आज ये ग्रुप जब मंच पर उतरता है, तो आपको देकर जाता है- कभी ना भूलने वाली यादें और सिखा जाता है जिंदगी को जीने का जज्बा...अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, पोलैंड, स्विटज़रलैंड, ग्रीस, इटली, स्पेन, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, टर्की, जापान, कोरिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर, मलेशिया, ब्रूनेई, थाइलैंड, इजिप्ट जैसे देशों में इस ग्रुप ने अपनी परफॉरमेंस दी हैं...

4 comments:

kaushal lakhotia said...

Very nice story.Keep it up. Its refreshing to see that its not just another blog. I hope you will maintain this standard. We need many more stories of this nature to preserve art and culture in our heart.

kaushal lakhotia

सतीश पंचम said...

जानकर अच्छा लगा। लगता ही नहीं कि ये पर्फारमेंस शारिरिक चुनैतीयों से जूझते लोगों की है।
अच्छी पोस्ट।
Word Verification को हटा दें तो टिप्पणी देने में सुविधा होगी। बेकार का झमेला लगता है ये Word Verification.

Prakhar said...

shivendra ke zariye zindgi ka adhbhut sangharsh dekhne ko mila... shivendra ko sadhuvad... taswiren dekh kar hi ankhe chal chala aain... hum vaha nahi the lekin shivendra ke likhne ke andaz ne vaha tak pahucha diya.... jaise man ki aankhen sab dekh rahi ho....

अजीत चिश्ती said...

adbhut bas ek vakya main
पस्त हौसले वाले तेरा साथ क्या निभाएंगे
ज़िन्दगी इधर आ तुझे हम गुजारेंगे ...
bas bhavnaon ko samjhe shabdon par mat jaaye :)